NEWS TODAY –  केके विश्वविद्यालय यूपीएससी स्टेट टॉपर शुभम को रोल मॉडल मानकर अपने छात्रों को आईएएस बनाने का करेगा काम-  नई शिक्षा नीति की शुरुआत ,,,,,, 

दीपक विश्वकर्मा (9334153201)  केके विश्वविद्यालय अब नई शिक्षा नीति की शुरुआत करने जा रही है साथ ही यूपीएससी टॉपर शुभम को रोल मॉडल मानकर बच्चों को मोटिवेट कर आईएएस बनाने का काम करेगा l यह जानकारी  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ सी बी रेड्डी ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी |  उन्होंने कहा कि यूपीएससी का टॉपर शुभम बिहार का है और मैं उससे मॉडल के रूप में मानकर बच्चों को मोटिवेट करना चाहता हूँ | उन्होंने कहा कि अगर मौका मिला तो शुभम को बुलाकर यूनिवर्सिटी की तरफ से सम्मानित किया जाएगा | उन्होंने कहा कि 30 साल के बाद बिहार का कोई टॉपर बना है | उन्होंने कहा कि 30 साल कोई छोटा वक्त नहीं होता है |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में उन्होंने कहा की  बच्चों को क्या पसंद आता है उसी के  तहत सभी प्रोग्राम को रीडिजाइन किया जा रहा है | उसके मकसद क्या है हर छात्र-छात्राओं के 4 वर्ष के कोर्स में कुछ नतीजे निकलने हैं बच्चे हर साल 1 साल अलग कोर्स करता है तो वह काबिल बन जाता है |  उन्होंने बताया कि यूजीसी द्वारा चवाईस  बेस्ट स्कील डेवलपमेंट के लिए  हर सेमेस्टर में एक कोर्स दिया जायेगा साथ ही अलग से यूपीएससी की तैयारी भी कराई जाएगी  उसके लिए 15000 स्क्वायर फीट का मॉडल फैसिलिटी बिल्डिंग की तैयारी की गई है  | विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डा.सीवी रेड्डी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा  नीति का मुख्य उद्देश्य जटिल शिक्षा को सरल बनाना है ताकि विद्यार्थियों पर अधिक भार नहीं पड़े । उन्होंने कहा नालंदा ज्ञान की भूमि  रही है। यहां से पूरी दुनिया को ज्ञान का सन्देश दिया गया है ।

ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता को बरकरार रखने में केके विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहीं से गुरुकुल शिक्षा पद्धति आरंभ हुई। वैदिक काल के बाद जैसे-जैसे समय बढ़ता गया बिहार की शिक्षा पद्धति भी उन्नत होती गई। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा की  इतनी समृद्ध शिक्षा और  संस्कृति होने के बावजूद हमारे छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे प्रदेश जाना पड़ रहा है। नालंदा की इस पावन धरती पर केके विश्वविद्यालय अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का सतत प्रयास कर रहा है एव समाज के हर तबके तक शिक्षा रोशनी पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।दरअसल इस विश्वविद्यालय की स्थापना कुलपति इंजीनियर रवि चौधरी, प्रति कुलपति इंजीनियर ऋषि रवि और निदेशक इंजीनियर रविशंकर प्रसाद सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में एक कीर्तिमान स्थापित करने के लिए शुरू की थी और अब यह उनकी सोच साकार होती दिख रही है |

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक संकाय प्रमुख प्रोफेसर डॉ नरेंद्र कुमार ने कहा कि केके विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी द्वारा सीबीसीएससी पद्धति से छात्रों का अध्ययन एवं मूल्यांकन कराने के साथ ही व्यक्तिगत विकास पर विशेष बल देता है। जिससे विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में आसानी से सफलता मिल जाती है। कहा नई शिक्षा नीति छात्रों को यह विकल्प देती है कि अगर कोई छात्र अपनी पढ़ाई किसी कारणवश बीच में ही छोड़ देता है तो उसे उस स्तर का प्रमाण देगा और फिर जब वह दोबारा से पढ़ाई करना चाहता है तो वहीं से कोर्स की शुरुआत की जा सकती है।विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के स्वर्णिम भविष्य को लेकर 15 हजार स्क्वायर फीट में विश्वविद्यालय का कौशल विकास स्टार्टअप एवं स्टैंडअप जैसे केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को धरातल पर लाया जा रहा है ।

जिससे विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान मिल सके।जिला के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में शुमार केके यूनिवर्सिटी ने एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है। जहां प्री नर्सरी ,केजी से लेकर लॉ कॉलेज बीटेक कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज आईटीआई कॉलेज बीएड कॉलेज जैसे कुल 12 डिग्री कोर्स की पढ़ाई की व्यवस्था है। वर्तमान में विश्वस्तरीय ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट की व्यवस्था अपने विद्यार्थियों को देने का कार्य कर रहा है । यहां के छात्र भारत समेत विश्व के नामचीन कंपनियों एवं इंडस्ट्रीज में काम कर रहे हैं। इस अवसर पर कुलसचिव डा. कौशलेंद्र पाठक , ड.संत कुमार सिंह परीक्षा नियंत्रक डॉ महेश बी एवं रणधीर कुमार के अलावा प्लेसमेंट ऑफिसर एवं विभिन्न संकाय अध्यक्ष उपस्थित थे।

अगले साल 2022 से ही केके विश्विद्यालय के विद्यार्थियों को देश के नामी-गिरामी इंडस्ट्रीज कंपनियां बच्चों के गुण एवं दक्षता को देखकर इंटर्नशिप देगी । नई शिक्षा नीति के बाद डिजिटल लिटरेसी एवं स्किल बेस्ड शिक्षा दी जाएगी । थर्ड सेमेस्टर के बाद इंटर्नशिप कंपलसरी हो जाएगी ।नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य भारत मैं प्रदान की जाने वाली शिक्षा को स्किल बेसेड व रोजगार परक बनना है। जिससे कि विद्यार्थियों को बेहतर ज्ञान के साथ स्किल भी मिले। जिससे कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे | स्कूली और उच्च शिक्षा में छात्रों के लिये संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय भाषाओं का विकल्प उपलब्ध होगा परंतु किसी भी छात्र पर भाषा के चुनाव की कोई बाध्यता नहीं होगी।विद्यालयों में सभी स्तरों पर छात्रों को बागवानी, नियमित रूप से खेल-कूद, योग, नृत्य, मार्शल आर्ट को स्थानीय उपलब्धता के अनुसार प्रदान करने की कोशिश की जाएगी ।विश्वविद्यालय के एडमिशन जीएम केसरी कुमार ने बताया कि कोविड-19 के बाद एडमिशन में थोड़ी शिथिलता आई है मगर जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही है वैसे-वैसे छात्र छात्राओं का एडमिशन के प्रति रुझान बढ़ रहा है |  उन्होंने कहा कि केके यूनिवर्सिटी शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले समय में न केवल नालंदा बल्कि पूरे बिहार के लिए मील का पत्थर साबित होगा |

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