NEWS TODAY – लेट्स इंस्पायर बिहार नालंदा चैम्बर की पहली बैठक में वीडियो कॉन्फरेंसिग के माध्यम से जुड़े आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ,,,,,

दीपक विश्वकर्मा (9334153201) बिहार शरीफ के आईएमए भवन में बुधवार  को नालंदा की कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया मौका था लेट्स इंस्पायर बिहार ,नालंदा चेंबर की पहली बैठक का | जिसमे  बिहार के कई ख्याति प्राप्त  शिक्षाविद नेताओं और कवियों ने अपने अपने विचारो का आदान प्रदान किया | बैठक के आयोजक रघुवंश कुमार ने बताया कि यह ऑर्गेनाइजेशन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पुलिस महानिदेशक विकास वैभव द्वारा चलाया गया यह एक मुहिम है जिसके माध्यम से लोगों को एक प्रेरणा मिल रही है  |
जीवन में कुछ कर गुजरने की तंमन्ना रखने वाले युवाओं  को यह मंच प्रेरित कर रहा है  | उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से समाज के प्रतिभावान युवाओं  को निखरने का मौका मिलेगा | उन्होंने कहा कि यह मुहिम पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा और यह नालंदा चेंबर की पहली बैठक आयोजित की गई है | दरअसल रघुवंश कुमार नालंदा के रहने वाले हैं वर्तमान समय में ये केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अश्वनी कुमार चौबे के साथ सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं | ये विकास वैभव को अपना इडियल मानते हैं |
रघुवंश  नालंदा के संयोजक बनाये गए हैं | बैठक के दौरान विकास वैभव वीडियो कॉन्फरेंसिग के माध्यम से जुड़े और युवाओं  के सवाल का जबाब दिया जिससे लोगो में उत्साह दिखा | आईपीएस अधिकारी विकास वैभव आज पूरे देश के अंदर किसी परिचय के मोहताज नहीं है |
विकास वैभव नाम आते ही लोग समझ जाते हैं कि ये  वही जांबाज आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने  बाहुबली अनंत  सिंह को 2017 में गिरफ्तार किया था | नाम विकास और उसके साथ वैभव, विकास यानी उन्नति ,वैभव यानि  ऐश्वर्य इनका जैसा नाम है वैसे ही इनकी विचारधारा  | बेगूसराय के छोटे से गांव बिहट के रहने वाले विकास वैभव आईटीआई कानपुर के होनहार छात्र रहे | महज 23 वर्ष की उम्र में देश की सर्वोच्च परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बन गए |
वर्तमान में इन्हें सरकार ने प्रोन्नति देते हुए आईजी बनाया और इन्हें गृह विभाग के विशेष सचिव की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई | सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहने वाले विकास वैभव उन युवाओं के दिल में बसते हैं जो जीवन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना रखने वाले हैं |
ऐसे प्रतिभावान लोगों को यह प्रोत्साहित करने का काम करते हैं | यही नहीं जो भी संभव हो उनकी मदद के लिए अपना हाथ बढ़ाते हैं | कहते हैं – मैं तो अकेले ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया -ठीक उसी प्रकार विकास वैभव के साथ हुआ है उनकी सोच का इतना विस्तार हो चुका है यह शायद इतनी ऊंचाई तक लोकप्रियता पाने वाले अब तक कोई दुसरे आईपीएस अधिकारी बिहार में नहीं होंगे |

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