नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल और सोनिया गांधी से पूछताछ किए जाने से आक्रोशित कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बिहार शरीफ में निकाला आक्रोश मार्च

दीपक विश्वकर्मा ,,,,,जिला कांग्रेस कमिटी अध्यक्ष दिलीप कुमार की अध्यक्षता में आक्रोश रैली निकालकर पुतला दहन किया गया । जो जिला कांग्रेस कमिटी कार्यालय राजेंद्र आश्रम से निकलकर जिला समाहरणालय पहुंचा जहां कांग्रेसियों ने वर्तमान की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की । साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी दहन किया गया .

जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार ने कहा यह आक्रोश मार्च एवं पुतला दहन कार्यक्रम वर्तमान की भाजपा सरकार की दोरंगी नीति एवं हिटलर शाही के खिलाफ किया गया है वर्तमान की सरकार विरोधियों को परेशान करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने में लगी है कभी सीबीआई का सहारा लिया जाता है तो कभी प्रवर्तन निदेशालय का सहारा लिया जाता है अभी हाल ही में 13,14 एवं 15 जून को जानबूझकर हमारे नेता एवं नेत्री श्रीमती सोनिया गांधी जी एवं राहुल गांधी जी को नेशनल हेराल्ड का बहाना बनाकर ईडी के द्वारा नोटिस दिलवाकर पूछताछ के बहाने उन्हें परेशान करने में लगी है


जबकि वास्तविकता यह है यह वही नेशनल हेराल्ड अखबार है जिसका नाम सुनते ही अंग्रेज के हुकूमत में खलबली मच जाती थी क्योंकि यह अखबार गुलामी के उस दौर में आजादी के दीवानों का साथी था एक ऐसा साथी जो क्रांति का जोश भरता था जो क्रांतिकारियों के विचारों को न केवल हिंदुस्तान बल्कि दुनिया भर में पहुंचाता था और विदेशियों को नेशनल हेराल्ड के जरिए ही भारत की आजादी के आंदोलन और अंग्रेजी क्रूरता के बारे में पता चलता था इससे भारतीयों के लिए आजादी की आवाज सीमाओं के बाहर से भी होने लगी और अंग्रेज हुकूमत पर उसका दबाव भी बनता जा रहा था नेशनल हेराल्ड की स्थापना भले ही नेहरू जी ने 1938 में की थी मगर अकेला नेशनल हेराल्ड महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद, तिलक, गोखले ,मदन मोहन मालवीय, सुभाष चंद्र बोस ,भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद की आवाज था और यही कारण है कि इससे भयभीत अंग्रेज हुकूमत इस पर कई बार ताला लगाने का दुस्साहस किया था आज फिर उसी की तर्ज पर नेशनल हेराल्ड के बहाने आजादी के दीवानों के सिपाहियों को परेशान करने का काम किया जा रहा है
सुब्रमण्यम स्वामी की एक शिकायत पर ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी मोतीलाल बोरा के खिलाफ कार्रवाई शुरू की लेकिन शुरुआती जांच में ईडी ने पाया कि इस मामले में कोई केस बनता ही नहीं है लिहाजा उस मामले को साल 2015 बंद कर दिया गया था जबकि उस समय भी मोदी की सरकार थी
अब साल 2018 -19 में इस मामले को फिर से जानबूझकर ईडी के द्वारा खुलवाया गया इसलिए कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा को हरा कर सत्ता हासिल की थी उसके बाद फिर मामला शांत हो गया अब एक बार फिर इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समन भेजा गया है वह भी उस समय में जब उदयपुर चिंतन शिविर के तुरंत बाद जहां भारत जोड़ो का नारा देकर कांग्रेस ने खुद को जनता के बीच आने का संकेत दिया था घटना की जानकारी इसलिए दे रहा हूं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी साफ दिख सके
दरअसल आजादी के बाद समय के साथ नेशनल हेराल्ड अखबार घाटे में जाने लगा था इस संकट से उबारने के लिए कांग्रेस ने साल 2002 से 2011 के बीच ₹90 करोड़ लगभग 100 किस्तों में ऋण के रूप में दिया इस ₹90 करोड़ में से 67 करोड़ रूपया नेशनल हेराल्ड ने अपने कर्मचारियों का वेतन और भीआरएस का भुगतान करने के लिए उपयोग किया बाकी बचे रुपये से उसने बिजली शुल्क किराएदार शुल्क एवं भवन व्यय आदि में खर्च किया
यहां सबसे बड़ा दिलचस्प पहलू यह है कि आजादी की लड़ाई लड़ने वाले अखबार आजादी के बाद भी अपने कर्मचारियों के भविष्य के लिए किस कदर चिंतित था मतलब उसूल जिंदा थे
अब माली हालत खराब के चलते यह ₹90 करोड़ का ऋण नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा चुकाना संभव नहीं था इसलिए इसको कंपनी ने इक्विटी शेयरों में परिवर्तित कर दिया क्योंकि कांग्रेस इक्विटी शेयरों का स्वामित्व अपने पास नहीं रख सकती थी इसलिए इसको यंग इंडिया नामक नॉट फ़ॉर प्रॉफिट कंपनी को आवंटित कर दिया गया अब यहीं पर ध्यान देने की बात है जब कांग्रेस के पास स्वामित्व ही नहीं था जब नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी यंग इंडिया के पास चला गया तो राहुल गांधी या सोनिया गांधी या मोतीलाल बोरा घोटाला कैसे करेंगे क्योंकि कांग्रेस लीडरशिप के तौर पर सोनिया गांधी राहुल गांधी ऑस्कर फर्नांडीस मोतीलाल बोरा सुमन दुबे इत्यादि इस कंपनी की प्रबंध समिति के सदस्य रहे लेकिन स्वामित्व के नाम पर इनके हिस्से कुछ भी नहीं था नॉट फॉर प्रॉफिट अवधारणा पर स्थापित किसी भी कंपनी के शेयर धारक या प्रबंध समिति के सदस्य कानूनी रूप से कोई लाभांश वेतन या अन्य वित्तीय लाभ नहीं ले सकते हैं तो फिर ऐसी स्थिति में सोनिया जी या राहुल जी या यंग इंडिया में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी वित्तीय प्राप्ति या लाभ का प्रश्न ही नहीं उठता जब ऐसा कुछ हुआ ही नहीं तो क्राइम कैसा और सबसे बड़ी बात यह कि 90 करोड़ के बदले 5000 करोड़ का घोटाला कैसा मतलब सारे दावे हवा में सिर्फ पॉलिटिकल माहौल बनाया जा रहा है गांधी परिवार को निशाना बनाने के लिए लेकिन हमारे नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ईडी से भाग नहीं रहे औऱ न ही कोई कांग्रेसी डर रहा है बल्कि और जोश के साथ हमारे कार्यकर्ता पूर्णरूपेण मजबूती से इस हिटलर शाही सरकार का प्रतिकार करने के लिए सड़कों पर उतर गए हैं अब वह समय आ गया है जब जनता का भी सहयोग कांग्रेस को मिलना चाहिए इन 8 सालों में जनता ने देख लिया है कि किस तरह महंगाई किस तरह भ्रष्टाचार किस तरह बेरोजगारी बढ़ती जा रही है इस पर वर्तमान की सरकार का ध्यान ना होकर जनता को भटकाने के लिए अनर्गल बयान एवं तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं साधारण नौकरी तो छोड़ दीजिए अभी भारतीय सेना की बहाली में भी अग्निपथ सेना भर्ती के नाम पर नौजवानों को ठगने का काम किया जा रहा है चार साल के लिए ही नौकरी देना उसके बाद उन नौजवानों को जीवन भर भटकने के लिए छोड़ देना यह कैसी समझदारी है चार साल नौकरी के बाद वह न घर के रहेंगें न ही घाट के और न ही अच्छी सेवा ही देश को दे पाएँगे उनका अपनी जॉब और अपनी काम के प्रति ध्यान ही नहीं रहेगा अभी पूरे बिहार के छात्र नौजवान इस जॉब और इसकी परीक्षा का विरोध कर रहे हैं यह बिल्कुल ही सही है जिला कांग्रेस नालन्दा भी इसका पूर्ण रूपेन विरोध करती है साथ ही सरकार से इसे अविलम्ब वापस लेने की माँग करती है इस प्रदर्शन एवं पुतला दहन के बाद महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम लिखा गया एक ज्ञापन भी नालन्दा के ज़िलाधिकारी को दिया गया , कार्यक्रम में राजगीर के पूर्व विधायक रवि ज्योति कुमार जिला उपाध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद सिंह नंदू पासवान नवप्रभात प्रशांत महासचिव सर्वेंद्र कुमार उदय शंकर कुशवाहा फ़वाद अंसारी राजीव कुमार महताब आलम गुड्डु राजीव रंजन कुमार फ़रहत जवीं कृष्णा दास मीर अरशद हुसैन उस्मान गनी सभी प्रखंड के प्रखंड अध्यक्ष मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष के अलावे भारी मात्रा में कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।।

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