न्यूज़ टुडे नालंदा – बड़ी दरगाह में कल से शुरू होगा हजरत मख्दुमे जहाँ शेख शरफुद्दीन अहमद यहिया मनेरी रहमतुल्ला अलैह का सालाना उर्स ,,,,,,,

दीपक विश्वकर्मा ( 9334153201 ) बिहार शरीफ के बड़ी दरगाह में हजरत मख्दुमे जहाँ शेख शरफुद्दीन अहमद यहिया मनेरी रहमतुल्ला अलैह के आस्ताने पर लगने वाला सालाना उर्स कल से अकीदत के साथ शुरू हो जाएगा | 5 दिनों तक चलने वाले इस उर्स के मौके पर जिला प्रशासन के द्वारा व्यापक पैमाने पर तैयारी की गई है | उर्स में शामिल होने के लिए आज से ही देश के विभिन्न क्षेत्रों से जायरीनों  का आना शुरू हो गया है | उर्स के पहले दिन जिला प्रशासन द्वारा चादर पोशी की जाएगी उसके बाद से विधिवत इस उर्स मेले का आगाज हो जाएगा | इस मेले में न केवल खाने पीने की दुकानें लगाई गई हैं बल्कि मनोरंजन के लिए खेल तमाशे और झूले भी लगाए गए हैं |
इस मौके पर बड़ी दरगाह के गद्दी नशीन पीर साहब में कहा कि मखदूम साहब ने पूरी दुनिया को अमन का पैगाम दिया था यही कारण है कि यहां न केवल  हिंदुस्तान के बल्कि विदेशों से भी जायरीन आकर चादर पोशी करते हैं | ऐसी मान्यता है कि जो भी लोग सच्चे दिल से मखदूम के दरबार में मन्नते मांगते हैं उनकी मुरादें जरूर पूरी होती है | जमुई जिले से मखदूम के दरबार में अपने परिवार के साथ हाजरी लगाने आयी नाजिया बताती हैं की उनकी मन्नते पूरी हुयी है इस लिए वे मखदूम साहब के मज़ार पर चादर पोशी करने आयी हैं | इनका जन्म 16 दिसम्बर 1263 को पटना के मनेर नामक स्थान में हुआ था | इनके पिता का नाम  यहीया मनेरी  और माता का नाम बीबी रजिया था | इन्होने दर्शनशाश्त्र   , आयुर्बेद और अंक  गणित की शिक्षा अपने गुरु हजरत शर्फुदीन  अबुतौआमा से ली थी | जबकि सूफी  की शिक्षा हजरत नाज़िबुद्दीन  फिरदौसी से ली , ये 65 वर्ष की आयु में 1327  को बिहारशरीफ आये थे और 122 वर्ष की उम्र  तक यानि  1284ई तक वे 57 वर्षो तक विना भेदभाव के शोषित पीड़ित  दलित मानव समुदाय की सेवा कि थी और इन्होने1380 में हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया  |

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