NEWS TUDAY – 15 अप्रैल से बिहारशरीफ में खुल रहा है बीएससी एकेडमी-देश के तीन लाख से अधिक छात्रों को मिल चुकी है सफलता – नालंदा के बच्चे हैं प्रतिभाशाली सही मार्गदर्शन की जरूरत -नागेंद्र

दीपक विश्वकर्मा (9334153201 ) देश के 3 लाख से भी अधिक छात्र छात्राओं को रेलवे एसएससी और बैंकिंग सेवा में पहुंचाने वाले नागेंद्र कुमार सिन्हा अब नालंदा के छात्रों को नई राह दिखाने के लिए बिहारशरीफ के रामचंद्रपुर मछली मंडी के समीप आनंद मार्ग में 15 अप्रैल से बीएससी एकेडमी की शुरुआत करने जा रहे हैं | उक्त बातों की जानकारी बीएससी के निदेशक नागेंद्र कुमार सिन्हा ने बिहार शरीफ के डॉक्टर कालोनी में पत्रकार सम्मेलन के दौरान दी | उन्होंने कहा कि हमारी बैंकिंग सर्विसेज क्रॉनिकल अकादमी नामक संस्था 1993 से देश के विभिन्न प्रदेशों में चल रही है |

उनका मानना है कि वर्तमान परिवेश में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है जिसके कारण छात्रों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है जिसके कारण न  केवल उनका आर्थिक दोहन होता है बल्कि उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है | उन्होंने कहा कि यहां के छात्रों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए न्यूनतम फीस पर उनकी  तैयारी कराई जाएगी | उन्होंने कहा कि सीईटी ( कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट ) की भी तैयारी करवाई जाएगी और पूरा कोर्स टारगेट ओरिएंटेड है ताकि छात्र समय प्रबंधन के साथ-साथ आसानी से परीक्षा पास कर सके | उन्होंने कहा कि संस्थान की मैगजीन क्रॉनिकल पूरे देश में प्रसिद्ध है |

जो बच्चे मैथ क्यूकर पढ़ते  हैं उन्होंने  एम टायरा व इंग्लिश एस ईजी के लेखक चेतनानंद  सिंह का नाम जरूर सुना होगा ऐसे कई बड़े स्कॉलर इस संस्थान के हिस्सा है | जो पढ़ाई के साथ-साथ मॉक इंटरव्यू की व्यवस्था कराते  हैं | इस मौके पर सेंटर हेड  अंजिल कुमार और अनिल कुमार  मौजूद थे | दरअसल नागेंद्र प्रसाद सिन्हा नालंदा जिले के नूरसराय के नोसरा गांव के रहने वाले हैं इनकी प्रारंभिक शिक्षा नेतरहाट में हुई  उसके बाद 12वीं पटना साइंस कॉलेज और बीए ऑनर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी से इन्होंने किया |  इनकी इच्छा सिविल सर्विस में जाने की थी मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था |

इन्होंने वर्ष 1993 में रेलवे ,बैंकिंग एसएससी के लिए मैगजीन की शुरुआत की और इस मैगजीन को देश के अंदर में काफी लोकप्रियता मिली | उसके बाद उन्होंने बीएससी एकेडमी की स्थापना की  जिसकी शाखाएं आज देश के कई प्रांतों में चल रही हैं | सबसे बड़ी बात यह है की इनके क्लासरूम से 3 लाख  से भी अधिक छात्र-छात्राएं सफल होकर निकले हैं जो देश के विभिन्न कोने में पदस्थापित हैं |  बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मैं नालंदा का बेटा हूं और मैं नहीं चाहता कि यहां के बच्चों को लोग दिग्भ्रमित कर उन्हें गलत रास्ता बताएं हमारी सोच है कि यहां के बच्चे कम पैसे में आगे बढ़े और अपने मिशन को पूरा करें |  उन्होंने कहा कि नालंदा पूर्व से ज्ञान की भूमि रही है और यहां के बच्चे काफी प्रतिभाशाली हैं ऐसे में केवल उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है |

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